Sunday, September 18, 2005

भाग 15 : वादे के लिए

संजीव श्रीवास्तव के मोबाइल पर करीब छह मिस्ड कॉल पड़े थे। ऐसा नहीं था कि उन्होंने मिस्ड कॉल्स देखे नहीं थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर फोन उठाया नहीं। इनमें से पांच कॉल तो मीना ठाकुर के थे। संजीव ने मीना के साथ गुज़ारी रंगीन रात के दौरान कई वादे किए थे, जिन्हें अब उन्हें पूरा करना ही था। मीना के अलावा किसी दूसरी महिला ने उनसे वादे लिए होते तो वो शायद टाल जाते लेकिन मीना ? संजीव की आंखों में एक पल के लिए मीना के जिस्म का हर हिस्सा घूम गया। संजीव ने लंबी आह भरी और मुस्कुराते हुए मीना को फोन लगा दिया।
"क्या डार्लिंग, तुम्हारा एक फोन ही काफी होता है, पांच कॉल करने की क्या ज़रुरत थी ? कल रात का सुरूर अभी तक उतरा नहीं है, इसलिए हम सो रहे थे।" संजीव ने अपने अंदाज में सफ़ाई दी। लेकिन, मीना को शायद संजीव की इस अदा के बारे में बखूबी पता था, लिहाजा उसने सीधे सीधे सवाल जड़ दिया- "आप सोए...या खोएं.. मुझे मतलब नहीं है। आपको अपने वादे याद हैं या नहीं, जनाब आप मुझे सिर्फ़ यह बता दें।।"
संजीव को अच्छी तरह पता था कि मीना हर हाल में अपनी बात मनवा कर ही दम लेगी। इसलिए उसने मीना को छुट्टी देने की बात फौरन मान ली। संजीव ने मीना को आश्वासन दिया कि दो-दिन में वो बैठकर तय कर लेंगे कि मीना कब लंबी छुट्टी पर जा सकती है। साथ ही, संजीव ने मीना को साफ़ साफ़ बता दिया कि वो कोशिश तो पूरी करेगा लेकिन फिर भी पेट्रोल पंप वाला वादा पूरा करने में वक्त लग सकता है।
हालांकि, संजीव के लिए किसी को एक अदद पेट्रोल पंप दिलाना बड़ी बात नहीं थी लेकिन इन दिनों पेट्रोलियम मंत्रालय में जारी उठापटक और पिछले दिनों पेट्रोल पंप आवंटन में हुए घोटालों की जांच के बीच ये काम थोड़ा मुश्किल था। इसके अलावा, संजीव खुद पचड़े में भी नहीं पड़ना चाहता था। एक तरफ, मीना को दिया वादा था तो दूसरी तरफ ये तमाम उलझनें। इसी सोच विचार के बीच संजीव ने फोन उठाया और दोबारा मीना की घंटी बज उठी।
"मीना..संजीव दिस साइड। मैंने तुम्हारे शुक्ला जी के पेट्रोल पंप के काम के बारे में ही सोच रहा था। तुम ऐसा करो-मिस्टर शुक्ला को कल मेरे पास भेज दो।"
मीना ने धीरे से "ओके" कहा और मोबाइल बिस्तर पर पटक दिया। मीना और संजीव के बीच ये शायद अभी तक की सबसे छोटा वार्तालाप था। दोनों को एक दूसरे से कुछ काम नहीं भी होता था तो भी वो इधर-उधर की बातें कर ही लेते थे लेकिन आज की बातचीत के बाद संजीव को कुछ बुरा लगा।
संजीव ने भी फोन रखा और अख़बार खोल कर हेडलाइन्स पर नज़र दौड़ा दी। दुनिया की सबसे महंगी कार और नीचे बलात्कार....ये कैसे समाचार। संजीव को एक पल के लिए गुस्सा आ गया...पेज सेटिंग की कोई तमीज़ ही नहीं है। संजीव बुदबुदाया....। इसी दौरान, उसकी नज़र दो कॉलम की छोटी सी एक ख़बर पर पड़ी -"पेट्रोलियम मंत्रालय से कई अहम दस्तावेज चोरी " । संजीव ने उसी वक्त दफ़्तर फोन किया और पता किया कि किस रिपोर्टर ने ख़बर दी थी। रिपोर्टर का नाम पता चलने के बाद संजीव के दिमाग में मिस्टर शुक्ला का काम कराने की योजना तैयार हो चुकी थी। संजीव ने रिपोर्टर भानु प्रताप को फोन किया-
"वैल डन भानु, अच्छी ख़बर निकाली है पेट्रोलियम मिनिस्ट्री से। आज कई अख़बार पलटे मैंनें, सिर्फ अपने यहां यह ख़बर है।"
"जी हां सर, कल देर रात मेरे सोर्स ने ख़बर दी थी। कई दस्तावेज हैं सर। हाल ही में हुए घोटाले से जुड़े भी।" भानु ने अपनी तरफ़ से ख़बर को विस्तार से बताया।
"ठीक है, तुम ऐसा करो आज इसी स्टोरी पर एक जानदार एंकर लिखो। साथ में, पेट्रोलियम मिनिस्टर से भी बात करो। देखें क्या कहता है। और हां...घोटाले के मामले में जिन जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, अगर उनसे जुड़े कागज़ात भी गायब हुए हैं तो इस बारे में एक अलग ख़बर तैयार करो, उसे पहले पेज पर छापेंगे। " संजीव ने भानु को निर्देश दिया और एक बार फिर मीना का फोन घनघना दिया।
"डॉर्लिंग...तुम्हारा काम हो गया समझो। शुक्ला जी से कहो...निश्चिंत रहें।"

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