Sunday, August 07, 2005

भाग आठ : ;चैनल टू की रश्मि

दोपहर के दो बज रहे थे। दिन के दूसरे पहर तक चैनल टू के ऑफ़िस में सरगर्मियां नदारद थी। जो रिपोर्टर दफ़्तर में थे, वो गप्प लड़ा रहे थे,जबकि डेस्क वाले किसी बड़ी ख़बर के न आने की दुआ मांगते हुए घर जाने का इंतज़ार कर रहे थे। हालांकि,समाचारों की इस हलचली दुनिया के सन्नाटे में अमिष का काम जारी थी।उसे अगले महीने की शुरुआत से ही एक खास ट्रैवल शो शुरु करने का जिम्मा सौंपा गया था। शुरुआत कश्मीर की हसीं वादियों से होनी थी, जिसे लद्दाख होते हुए अंडमान में समुन्दर में समाना था। तीस एपिसोड के इस शो की रुपरेखा तैयार करने से लेकर उसकी स्क्रिप्ट लिखने,एंकर तय करने और फिर सही वक्त पर प्रोमो चलवाने तक का जिम्मा अमिष का ही था। अमिष को इतनी बड़ी जिम्मेदारी पहली बार सौंपी गई थी,लिहाज़ा उसका चिंतित होना लाज़िमी था।
अमिष ने लोकेशन के बारे में सोच रखा था। स्क्रिप्ट का भी मोटा मोटा अंदाज़ उसे था। लेकिन,वो एंकर के बारे में तय नहीं कर पा रहा था।उसे एक ऐसी एंकर की तलाश थी,जो कश्मीर की कुर्ती से लेकर चेन्नई की साड़ी तक में न सिर्फ़ खूबसूरत लगे बल्कि सेक्सी भी लगे। वो चेहरा ऐसी कशिश पैदा करे कि दर्शक की निगाह एक पल के लिए ठहर जाए। दरअसल, अमिष की स्पष्ट धारणा थी कि टेलीविज़न आकर्षक चेहरे-मोहरे वालों का माध्यम है।दर्शक पहले खूबसूरत-आकर्षक चेहरे को देखकर रुकता है और फिर कंटेंट में दम हो तो ठहरता है।लेकिन...चैनल टू में क्या कोई ऐसा चेहरा है ?
अमिष ऐसे चेहरे की तलाश को लेकर अपने मन के घोड़े दौड़ा ही रहा था कि उसे पीछे से एक आवाज़ सुनाई दी।
"हैलो सर, आई एम रश्मि....। रश्मि पाठक । मैं मिस्टर अमित कुमार के रिफ़रेंस से आपके पास आई हूं।उन्होंने मुझे बताया था कि आपको एक एंकर की तलाश है।"
अमिष ने रश्मि का धीरे से अभिवादन किया लेकिन उसी एक पल में उसने इस नाज़नीन को निहार लिया। खूबसूरत,शोख,हसीं,दिलकश जैसी तमाम उपमाएं अचानक उसके जुबां पर आकर ठहर गईं।अमिष ने रश्मि को बैठने का इशारा करते हुए कहा- "अपना बायो डेटा लाई हैं आप? "
रश्मि ने मुस्कुराते हुए अपना बायो डेटा अमिष की तरफ बढ़ा दिया। हालांकि,रश्मि के CV में वो सब था, जिससे उसे एंकर की जॉब मिल सकती लेकिन हकीकत यह थी कि अमिष ने उसे देखते ही तय कर लिया था कि वो ही उसके शो की एंकर होगी।
रश्मि का औपचारिक सा साक्षात्कार लेने के बाद अमिष ने उससे जाने को कह दिया।

1 Comments:

At 9:50 AM, August 01, 2011, Blogger ramesh chandra said...

dhanyvad/ek achha w aaj ke yug ke khokhle or shareerik aakrshn ke risto w vasnao ka kachcha chittah kholte h aap ko phir se dhanyvad/ramesh chandra dhanka

 

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