Tuesday, August 02, 2005

भाग सात : लेट्स इन्जॉय

आज ऑफ़िस में अजीब सा सन्नाटा पसरा था। ऑफ़िस ब्यॉय सभी वक्त पर अपनी यूनिफ़ॉर्म में मौजूद थे और सभी निर्देशों का तत्काल पालन किया जा रहा था। कंप्यूटर की बोर्ड से उंगलियों के मिलाप की आवाज़ भी रह रह कर गूंज रही थी।घड़ी अपनी रफ़्तार से दौड़ रही थी लेकिन संपादक संजीव श्रीवास्तव के केबिन के बाहर बैठे सभी रिपोर्टर,सब एडिटर और दूसरे कर्मचारी सांस रोके केबिन की तरफ नज़र गढ़ाए बैठे थे। दरअसल,इंडियन टाइम्स के मालिक प्रह्लाद कुमार आज काफ़ी दिनों बाद ऑफ़िस पहुंचे थे। उन्होंने आते ही संजीव श्रीवास्तव और मीना ठाकुर को बुला भेजा। उनके चेहरे के भाव साफ़ कह रहे थे कि मामला कुछ गड़बड़ है।
"आप लोग अब इतने बड़े पत्रकार हो गए हैं कि एक मिनिस्टर को ऐसी तैसी करने से पहले आप मुझे बताना तक ज़रुरी नहीं समझते? आज आपने कदम का दम निकाला है, कल आप किसी और की ले लेंगे। कुछ चंडूखाने की ख़बर भी आप छाप सकते हैं।"
"सर,पूरी तहकीकात के बाद ही हमने कदम के बारे में रिपोर्ट छापी है।मीना ने पूरे दो हफ़्ते तक इस रिपोर्ट पर काम किया है।घोटाले से जुड़े सारे दस्तावेजों की फोटो कॉपी हमारे पास है।"
"लेकिन,मैं पूछ रहा हूं कि एक मिनिस्टर की झंड करने से पहले क्या आप अख़बार के मालिक को बताना तक ज़रुरी नहीं समझते? मेरे पास कल रात में होम मिनिस्टर का फ़ोन आया था। पूछ रहे कि थे क्या पूरे सबूतों के साथ ख़बर छापी गई है या.....। अब अपन को कुछ पता हो तो उन्हें बताऊं"
"सॉरी सर। " संजीव श्रीवास्तव के पास प्रह्लाद कुमार के विष बुझे सवालों की बस एक यही ढाल थी।
"सॉरी...सर..वी विल टेक केयर इन फ़्यूचर " मीना ने भी धीरे से खेद प्रकट कर डाला।
सॉरी की लोरी सुनकर प्रह्लाद कुमार का क्रोध कुछ शांत हुआ। मीना की क़ातिल मुस्कुराहट में उनके गुस्से पर और पानी डाला।संजीव ने भी हालात को समझते हुए फौरन तीन कॉफी का ऑर्डर दे दिया।
"लाइए...सारे दस्तावेज दिखाइए। किस आधार पर आप लोगों ने कदम और उसके पीए की कहानी झंड की है।"
संजीव ने अपने लॉकर से सारे दस्तावेज प्रह्लाद कुमार के सामने रख दिए।मीना ने भी उनमें से खास कागजों को ऊपर रख दिया। प्रह्लाद कुमार ने उनपर गंभीरता से नज़र मारी और फिर सारे डॉक्यूमेंट समेट कर संजीव के हाथ में धर दिए।
"वेल डन। गुड वर्क। मज़ा आ गया। "
"यू पीपल हैव डन फेन्टास्टिक जॉब। इस बात पर एक पार्टी होनी चाहिए। अगले संडे को एक पार्टी का ऐलान कर दो। ली मेरेडियन में। हां..लेकिन अब आगे से ध्यान रखना कि ऐसी कोई भी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट कवर करने से पहले मुझसे पूछ लिया करो।"
प्रह्लाद ने संजीव की तरफ़ मुस्कुरा कर देखा और केबिन से बाहर निकल लिए। संजीव ने शरारती अंदाज़ से मीना को निहारा और उसे इशारा करते हुए प्रह्लाद कुमार के पीछे भागा।....बॉस आई एम कमिंग.......................

1 Comments:

At 7:24 PM, February 25, 2010, Anonymous Anonymous said...

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