Wednesday, July 27, 2005

भाग छह :कुल्लू की कुंठा

"साला,भगवान जब पैसा देता तो छप्पर फाड़ कर देता है। आदमी एक झटके में चिरकुट से चंपक लाल बन जाता है।" फाइव स्टार होटल के आलीशान सूट में बैठा कुल्लू लक्ष्मीपतियों के बारे में अपने अंदाज़ में चिंतन कर ही रहा था कि एक आवाज़ ने उसके ध्यान में खलल डाल दिया।
"हाई....हाऊ आर यू डूइंग? आई एम सॉरी....मैंने आपको इंतज़ार कराया।" मल्लिका ने अपनी क़ातिल मुस्कान के साथ कुल्लू से खेद ज़ाहिर कर दिया।
हांलाकि, कुल्लू ने अपने फिल्मी पत्रकारिता के करियर में जवां दिलों की धड़कन माधुरी दीक्षित और ऐश्र्वर्या राय से लेकर सेक्सी बिपाशा बसु तक सैकड़ों अभिनेत्रियों के वन टू वन इंटरव्यू किये थे लेकिन मल्लिका को देखकर उसे लगा कि वो सभी सिर्फ़ नाम की हुस्न परियां हैं। असली हुस्न परी तो सिर्फ़ एक है-वो है मल्लिका। कुल्लू एक बार पहले भी मल्लिका से मिल चुका था लेकिन तब उसमें वो बात नहीं थी। आज की मुलाकात ही कुछ अलग थी। कुल्लू को मल्लिका का हुस्न संगमरमर की तरह चिकना दिखायी दे रहा था। उस पर मल्लिका के अंदाज़-ए-बयां सोने-पे-सुहागा।
हालांकि,सूट का कमरा काफी बड़ा था लेकिन वहां सिवाय थोड़े फर्नीचर के और कुछ नहीं था।लगभग खाली कमरा..उस पर एक सोफे पर हुस्न परी और कुल्लू साथ...। बातों बातों में मल्लिका ने दो-तीन बार कुल्लू के हाथों पर हाथ रख दिया तो कुल्लू की सारी इंद्रिया एक साथ उछाल मारने लगीं।महज़ एक-सवा फीट की दूरी से ऐसी खूबसूरत महिला को निहारने का अनुभव.... जिसने जैसे तैसे अपने उरोजो और जांघ को ढकने के लिए वस्त्र पहने हों...उफ़....कुल्लू की फ़िल्म पत्रकारिता मानो एक झटके में मल्लिका ने अपनी जांघों के नीचे से निकाल दी।
इंटरव्यू खत्म हो गया। कुल्लू ने ऑफिस की तरफ अपनी गाड़ी दौड़ा दी। कुल्लू के मल्लिका को धोने के सब अरमां उसकी क़ातिल अदाओं में बह चुके थे। कुल्लू को इंटरव्यू आज ही फाइल करना था। कल छपना ही था।आखिर.एक्सक्ल्यूसिव इंटरव्यू जो था।कुल्लू ने अपनी डेस्क पर कंप्यूटर ऑन किया और दबे होंठों से चार छह गालियां बुदबुदा डाली। बहुत सोचा था कि मल्लिका से ऐसे सवाल पूछेगा कि उसकी अक्ल ठिकाने आ जाएगी लेकिन हुआ क्या-झांट?
कुल्लू ने जैसे तैसे इंटरव्यू पूरा किया। लेकिन मज़ा नहीं आया। मज़ा आता तो कैसे ? इंटरव्यू में सिवाय मल्लिका की खूबसूरती और भावी योजनाओं का ही तो ज़िक्र था। कुल्लू ने कोई ऐसा सवाल पूछा ही नहीं था तो फिल्मी पत्रिकाओं से हटकर हो।जिसमें दम हो।
रात का एक बज चुका था। कुल्लू ने इंटरव्यू खत्म किया और फीचर पेज़ के इंचार्ज को बता दिया। चार हज़ार करेक्टर का स्पेस उसने पहले ही छुड़वा दिया था। हालांकि..इंटरव्यू में ऐसा कुछ खास नहीं था,जिसे पढ़ने में उसे मज़ा आए लेकिन फिर भी उसने पूरा इंटरव्यू दोबारा पढ़ा और एक बार हेडलाइन पर नज़र डाली।हेडलाइन थी- जितना खूबसूरत जिस्म है उतना ही दिल भी।
कुल्लू को खुद पर कोफ़्त हुई। वो आखिर क्यों मल्लिका के मखमली जिस्म से आगे कुछ सोच नहीं पा रहा था ? बार बार उसे मल्लिका का बदन,उसकी अदाएं और अपनी जांघों पर उसका हाथ नज़र आ रहा था। ऑफिस से तकरीबन सभी लोग जा चुके थे और उसके केबिन के आसपास तो कोई भी नहीं था,जिससे वो बतिया सकता।हां..सामने रखे एक टेलीविजन पर ज़रुर स्टार मूवीज़ पर एक फिल्म चल रही थी।मल्लिका की सोच से उबरने का कुल्लू को कोई ज़रिया नहीं सूझ रहा था।
थोड़ी देर बाद......कुल्लू की कुंठा....उसकी पेंट में ढेर हो चुकी थी। कुल्लू ने लंबी सांस ली और घर की तरफ निकल पड़ा।

2 Comments:

At 7:20 PM, August 01, 2005, Anonymous Anonymous said...

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Ajay Shastri

 
At 7:40 PM, August 01, 2005, Anonymous Anonymous said...

Ajay is absolutly right. This blog has given hindi blogging new dimension and i am sure that in future more guys will accept this style.
Ramesh

 

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