Saturday, July 23, 2005

भाग पांच- कदम का दम

रविवार का दिन दफ़्तर के बाहर जितना सन्नाटा लिए था, इंडियन टाइम्स के दफ़्तर में उतनी ही ज़्यादा सरगर्मी थी। दफ़्तर में जारी सरगोशियों से बखूबी समझा जा सकता था कि सोमवार यानि कल कोई धमाका होने वाला है। एडिटर संजीव श्रीवास्तव का हर दो पल बाद न्यूज़ एडिटर को बुलाना और फिर हर पंद्रह मिनट बाद पेज लेआउट रुम में जाना ये साबित कर रहा था कि कल धमाका होना ही है। इसी बीच,मीना ठाकुर तीर से तेज़ चाल के साथ एडिटर के केबिन में जा घुसी।
“ क्या बॉस. आ गया न मज़ा? मीना ने पूछा ”
“ तुम्हारे साथ कोई भी काम करना हो,मज़ा आ ही जाता है।” संजीव के ‘काम’ शब्द पर दिए अतिरिक्त ज़ोर ने दोनों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी।
“कल...लीड स्टोरी है तुम्हारी।चारों तरफ रिएक्शन होंगे। तुम अब एक फॉलोअप स्टोरी की तैयारी कर लो।आखिर...मुद्दा मिल गया है तो इस कहानी की बूंद बूंद चूस लेंगे।और हां...मुझे पता है कि कदम तुमसे संपर्क करने की हर मुमकिन कोशिश करेगा,इसलिए इस स्टोरी के खत्म होने तक तुम अपने घर नहीं सोओगी। मैंनें फीचर एडिटर रश्मि सक्सेना से बात कर ली है, तुम उसके साथ रहो। अमिष आजकल शहर में ही है क्या?” संजीव ने मीना को निर्देशों का पुलिंदा थमाते हुए आखिर में एक सवाल उछाला।
“नहीं, अमिष आउट ऑफ स्टेशन है।”
“वेरी गुड़..तो लग जाओ काम पर”
मीना ने सहमति में सिर हिलाया और केबिन से बाहर हो ली।संजीव ने फोन का रिसीवर उठाकर रश्मि सक्सेना को बुला भेजा।
रात ने नौ बजे थे। रविवार का सन्नाटा और गहरा हो चुका था। मीना और रश्मि दोनों घर जाने को तैयार खड़े थे। उनका दफ़्तर से बाहर निकलना हो ही रहा था कि पाटील सीने से दबाए अख़बार की दो कॉपी एडिटर के केबिन के तरफ़ लिए जा रहा था।
“ए..पाटील.. जस्ट वेट। लेट मी कम एंड सी।” मीना ये कहते हुए पाटील की तरफ़ लपकी। उससे अखबार छीनते हुए एक चैन की सांस ली। आखिरकार..कदम का भंडा फूट चुका था।
लीड हेडलाइन थी-फ़ॉरेस्ट मिनिस्टर कदम खालों के तस्करों का साथी, तीन करोड़ रुपये स्विस बैंक में जमा कराए
इतना ही नहीं, कदम के पीए मोहंती की भी पोल खुल चुकी थी। उसे जिस्मफरोशी के क्षेत्र में सफेदपोश दलाल बताया गया था, जिसकी बीवी भी उसके इस धंधे में बराबर की भागीदार थी।
खबर पढ़ने के बाद मीना मुस्करायी और दफ़्तर से बाहर हो ली।

2 Comments:

At 6:41 AM, July 24, 2005, Blogger SHASHI SINGH said...

पुरुजी, आपसे एक आग्रह है. कृपया गुगल भैया वाले प्रचार पट्टिका की जगह बदल दें. आपके लेखन को पढ़ पाने में इससे व्यवधान पढ़ता है.

 
At 3:51 PM, July 27, 2005, Blogger Puru said...

शशि जी, मैं जल्द ही आपके सुझाव पर अमल करुंगा।
ब्लॉग बढ़ने के लिए शुक्रिया

 

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