Thursday, June 16, 2005

भाग-1 (मीना ठाकुर : नामचीन नाज़नीन)

सूरज की तपिश बाहर भले ही अंगारे बरसा रही थी लेकिन “इंडियन टाइम्स ” के दफ़्तर के भीतर अचानक मौसम बेहद खुशगवार हो उठा था। कई चेहरों पर मुस्कान खिल उठी और कई नज़रों में लौ जल पड़ी।... और फ़िज़ा महक उठी एक शानदार खुशबू से।बदली रंगत को देखकर “समझदार” लोग समझ गए कि मीना ठाकुर ऑफिस पहुंच चुकी हैं।
मीना ठाकुर पेशे से तो पत्रकार थी लेकिन उसमें अदाएं ऐसी कि फिल्मी हीरोइनें भी मात खा जाएँ। दरअसल, मीना में ये अदाएं यूं हीं नहीं थीं। उसकी पेड़ सी लंबाई, जिसके तने से लिपटी काली ज़ुल्फ़ें.....रंग सांवला लेकिन उनमें भी अजीब सी कशिश...। किसी शायर के लिए वो पूरी एक नज़्म सी और दफ़्तर के लोगों के लिए- जबरदस्त सेक्सी।
“गुड मॉर्ऩिंग पाटील, हाऊ आर यू डुइंग। क्या ख़बर है आज ? ”
“कुछ खास नहीं” पाटील ने लगभग सकपकाते हुए जवाब दिया।दरअसल,पाटील को कतई अंदाज़ नहीं था कि उसके ख़्वाबों की हसीना अचानक कोने में बैठे उस अंजान से शख्स से इस तरह कोई सवाल करेगी।
मीना ठाकुर ने पाटील से सवाल किया और सीधे पास बने एडिटर के केबिन में घुस गई।
“यस बॉस- कोई खास असाइनमेंट मुझ नाचीज़ के लिए” मीना ने आँखों में शरारत और होठों पर मादकता लिए अपने दिलकश अंदाज़ में एडिटर संजीव श्रीवास्तव से पूछा।
“नो डियर । खास असाइनमेंट होता है तो बंदा खुद तुम्हारे दरवाजे पहुंच जाता है।” संजीव ने भी उसी शरारत से जवाब दिया।
“बट सिट डाउन। आई हैव एन इंटरेस्टिंग असाइनमेंट फॉर यू।मुझे पता लगा है कि फॉरेस्ट मिनिस्टर पी.के.कदम का अपने पी.ए की बीबी से चक्कर चल रहा है।लेकिन..दिलचस्प बात ये है कि कदम के पी.ए शेखर मोहंती को न केवल इस गड़बड़झाले की खबर है बल्कि वो जानबूझकर अपनी बीबी को मंत्री के आगे परोस रहा है।वो भी अपने किसी फायदे के लिए नहीं बल्कि किसी और के कहने पर।मैं चाहता हूं तुम पता लगाओ....क्या मामला है। बड़ा स्कूप बन सकता है यह।”
“यस बॉस-आई विल ट्राई”। ये कहते हुए मीना केबिन से बाहर निकल गई।

12 Comments:

At 6:05 AM, June 21, 2005, Blogger Www.mediabharti.com said...

Dear Puru, Tum shuru to ho gaye par ye batao mein parhoon kya?
Mein samajh nahin pa raha hoon ki google ko parhoo ya tumhare wahiyat novel ko!
By the way, Thanks for waste my time.

 
At 12:39 AM, August 03, 2005, Anonymous kartika tyagi said...

Dera Puru..

whatever has been posted seems intresting..I myself am really fond of hindi literature..but th problem is these stupid google ads are blocking the entire blog of yours..please do something bout it..
Kartika

 
At 5:18 AM, August 23, 2006, Blogger M. K. Malviya said...

I love reading novels.I have great interest in novels.Its a good.

 
At 2:19 PM, March 11, 2007, Anonymous Anonymous said...

क्या यह किताब प्रिंट में भी है ? क्या यह आपके ब्लॉग के अलावा कहीं अन्यत्र और किसी साइट में लगातार छप रही है ? क्या इसे यदि कोई अपने साइट में छापे तो आपका क्या कहना होगा ।

जयप्रकाश मानस
www.srijangatha.com
srijangatha at gmail.com

 
At 1:40 PM, April 08, 2007, Anonymous popi said...

hi puru i am a journlist.acci kosis hai sexy press line story ke leye but pure story me kahi time period bhe badal diya hota to tik tha ,kab tak office se ghar aur bedroom tak punchate rhoge yaar kuch twist do to baat jame.

 
At 5:16 PM, June 13, 2007, Blogger Payal said...

arey puruji...
19th ke aage ke parts bhi to post kijiye...
interesting hey...ek hi baar me sare parts padh leye..

thankss..

 
At 11:29 PM, February 07, 2010, Anonymous Anonymous said...

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lolikneri havaqatsu

 
At 8:58 PM, March 06, 2010, Blogger rajeshsharma7777 said...

I have a hinglish article.Please comment on my writing.
http://www.my-nargis.blogspot.com/

 
At 10:50 AM, August 15, 2010, Anonymous Anonymous said...

Bhosdi ke saale, sirf kahani likta hai ya apni MAA aur BEHEN ki supply bhi karta hai. Teri kahani padh kar land khada ho gaya. apni BEHEN ko bhej de. usi me apna lund thanda karunga.

 
At 10:51 AM, August 15, 2010, Anonymous Anonymous said...

MAA kasam teri kahani padh kar teri GAND marni ki khwahis ho gayi. apne ghar ka pata de, main wahin aaunga...

 
At 8:15 PM, January 18, 2013, Anonymous Anonymous said...

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At 6:07 PM, March 28, 2013, Anonymous Anonymous said...

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